कुंडली दोष चेकर — मंगल, कालसर्प, पितृ दोष और साढ़ेसाती की जांच
कुंडली दोष चेकर — सभी प्रमुख दोषों की एक साथ जांच
वैदिक ज्योतिष में कुंडली में कई तरह के दोष बताए गए हैं — जैसे मंगल दोष, कालसर्प दोष, पितृ दोष aur शनि की साढ़ेसाती। ये सभी अलग-अलग ग्रह स्थितियों से जुड़े होते हैं aur जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। नीचे अपनी जन्मतारीख़ aur समय डालें — एक साथ इन सभी प्रमुख दोषों की प्रारंभिक जांच पाएं।
कुंडली में मुख्य 4 दोष कौन से माने जाते हैं?
| दोष | कारण | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| मंगल दोष | मंगल का 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना | विवाह, वैवाहिक जीवन |
| कालसर्प दोष | सभी ग्रह राहु-केतु के बीच स्थित होना | जीवन में अचानक रुकावटें |
| पितृ दोष | सूर्य/राहु पर पितृ स्थान का अशुभ प्रभाव | पारिवारिक उन्नति, संतान सुख |
| शनि साढ़ेसाती | शनि का चंद्र राशि के आगे-पीछे गोचर | 7.5 वर्ष तक जीवन में उतार-चढ़ाव |
इन दोषों की सटीक पुष्टि कैसे होती है?
ऊपर दिया गया टूल केवल एक सामान्य, प्रारंभिक संकेत देता है। वास्तविक aur सटीक दोष-विश्लेषण के लिए ज्योतिषी आपकी संपूर्ण जन्म कुंडली — जिसमें जन्म तारीख़, सटीक समय aur जन्म स्थान तीनों शामिल हों — का विस्तृत अध्ययन करते हैं। खासतौर पर कालसर्प दोष aur पितृ दोष जैसी जटिल स्थितियों के लिए ग्रहों की सटीक डिग्री तक की गणना आवश्यक होती है, जो बिना जन्म स्थान के संभव नहीं।
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